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एआई की आड़ में पत्रकारिता या पत्रकारिता की आड़ में एआई…!

संपादकीय

एआई की आड़ में पत्रकारिता या पत्रकारिता की आड़ में एआई…!

तकनीक ने कलम को गति दी है,लेकिन सच लिखने का साहस आज भी किसी सॉफ्टवेयर में डाउनलोड नहीं हो

विकास रधुवंशी प्रधान संपादक
पत्रकारिता ने स्लेट से लेकर कंप्यूटर और टाइपराइटर से लेकर स्मार्टफोन तक का सफर देखा है। हर दौर में तकनीक बदली,लेकिन एक चीज कभी नहीं बदली-सच्चे पत्रकार की जिम्मेदारी। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने खबर लिखने की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। कुछ सेकंड में शीर्षक,खबर और विश्लेषण तैयार हो जाता है। सवाल तकनीक का नहीं, उसके इस्तेमाल का है।बैतूल सहित कई स्थानों पर सोशल मीडिया पर एआई से तैयार खबरों की बाढ़ दिखाई दे रही है। कहीं तथ्यों की पुष्टि नहीं, कहीं आधी-अधूरी जानकारी, तो कहीं सनसनी फैलाने वाली भाषा।चिंता तब और बढ़ जाती है जब ऐसी सामग्री के आधार पर प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाने या व्यक्तिगत हित साधने की कोशिशों की चर्चा सामने आती है।यदि ऐसा हो रहा है तो यह पत्रकारिता नहीं,बल्कि उसके नाम का दुरुपयोग है।एआई एक उत्कृष्ट सहायक हो सकता है,लेकिन वह संवाददाता नहीं बन सकता। वह घटनास्थल की धूल नहीं देखता,पीड़ित की आंखों के आंसू नहीं पढ़ता,न ही जनभावनाओं की नब्ज़ समझता है।वह केवल उपलब्ध जानकारी के आधार पर मसौदा तैयार करता है। अंतिम जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की होती है,जिसके नाम से खबर प्रकाशित होती है।आज आवश्यकता इस बात की है कि पत्रकारिता के मानकों पर गंभीर चर्चा हो। क्या केवल मोबाइल और इंटरनेट होने से कोई पत्रकार बन जाता है,क्या बिना तथ्य जांचे,बिना समाचार लेखन का ज्ञान और बिना मीडिया नैतिकता समझे समाज के सामने कोई भी सामग्री परोस देना उचित है।पत्रकारिता केवल कॉपी-पेस्ट या प्रॉम्प्ट-पेस्ट का खेल नहीं है। यह अध्ययन,अनुभव, संवेदनशीलता और जवाबदेही का पेशा है।जो लोग वर्षों से गांव-गांव घूमकर,दस्तावेज़ खंगालकर और जनहित के मुद्दे उठाकर पत्रकारिता कर रहे हैं,उनके लिए एआई एक नया औजार है।लेकिन जो लोग केवल तकनीक के भरोसे स्वयं को बड़ा पत्रकार साबित करना चाहते हैं,उनके लिए यह सुविधा भले हो, विश्वसनीयता नहीं।तकनीक का स्वागत होना चाहिए, लेकिन विवेक के साथ। एआई का उपयोग खबर को बेहतर बनाने के लिए हो, सच को बदलने के लिए नहीं। क्योंकि अंत में पाठक खबर नहीं,भरोसा खरीदता है। और भरोसा किसी एल्गोरिद्म से नहीं, ्ईमानदार कलम से पैदा होता है।

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