कलेक्टर साहब,ज़रा इधर भी नज़र डालिए…! भू-माफियाओं का जाल, भोले-भाले लोगों की जिंदगी दांव पर
औद्योगिक विकास के नाम पर सपने बेचे जा रहे,कृषि भूमि को सोने की खान बताकर कई गुना कीमत वसूली जा रही अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनियों पर प्रशासनिक सख्ती की उठी मांग

यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों और जमीन कारोबार का यह खेल भविष्य में हजारों खरीदारों के लिए कानूनी संकट बन सकता है
विशेष रिपोर्ट
औद्योगिक विकास, मेडिकल कॉलेज,फोरलेन सड़क और भविष्य की बड़ी परियोजनाओं का सपना दिखाकर ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त का कारोबार तेजी से फैलता दिखाई दे रहा है।विशेष रूप से ग्राम पंचायत सुखाढाना सहित आसपास के क्षेत्रों में कुछ कथित भू-माफिया और उनके एजेंट भोले-भाले लोगों को गुमराह कर कृषि भूमि को कई गुना अधिक कीमत पर बेच रहे हैं।जानकारी के अनुसार,जिस भूमि का सरकारी मूल्य अपेक्षाकृत कम है,उसे भविष्य में औद्योगिक क्षेत्र बनने, सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज या फोरलेन परियोजना आने जैसी अपुष्ट अथवा भ्रामक जानकारियों के आधार पर 25 से 30 लाख रुपये प्रति एकड़ तक बेचा जा रहा है। इस पूरे कारोबार में कई एजेंट सक्रिय बताए जाते हैं,जो खरीदारों को बड़े मुनाफे के सपने दिखाकर सौदे करवा रहे हैं।विकास के सपनों का सहारा, हकीकत कुछ और स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2004 के बाद से क्षेत्र में अपेक्षित औद्योगिक विस्तार नहीं हो पाया। 660 मेगावाट की सुपर क्रिटिकल इकाई जैसी परियोजनाएं भी लंबे समय तक विलंबित रहीं।वहीं, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) और मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के कर्मचारियों के लगातार सेवानिवृत्त होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है।रोजगार के नए अवसर सीमित होने के बाद भी जमीनों की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाकर प्रचारित की जा रही हैं।कुछ वर्ष पहले नगर पालिका परिषद सारनी क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां विकसित हुई थीं। बाद में नियमन की प्रक्रिया के दौरान कई मामलों में भारी जुर्माने और नोटिस जारी किए गए। ऐसे में यदि ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिना वैधानिक अनुमति के प्लॉटिंग या कॉलोनी विकास किया जा रहा है तो भविष्य में खरीदारों को भी कानूनी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि राजस्व विभाग,जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से ऐसे मामलों की जांच करें।यह भी देखा जाए कि कहीं कृषि भूमि का अवैध डायवर्जन, बिना स्वीकृति प्लॉटिंग या भ्रामक प्रचार के माध्यम से लोगों से करोड़ों रुपये तो नहीं वसूले जा रहे हैं। यदि अनियमितताएं मिलती हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।मध्यप्रदेश के कई जिलों में पिछले कुछ वर्षों में प्रशासन द्वारा अवैध कॉलोनियों और बिना अनुमति प्लॉटिंग के खिलाफ अभियान चलाए गए हैं। अनेक स्थानों पर नोटिस जारी हुए,जुर्माने लगाए गए और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई। ऐसे में बैतूल जिले में भी समय रहते प्रभावी निगरानी आवश्यक मानी जा रही है।










