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माननीय का विकास मॉडल या मौत का मंजर सड़क पर बिछी ख़ामोशी ने जनप्रतिनिधियों के ज़मीर से पूछा सवाल

माननीय का विकास मॉडल या मौत का मंजर सड़क पर बिछी ख़ामोशी ने जनप्रतिनिधियों के ज़मीर से पूछा सवाल

सिर्फ़ पाँच मीटर की दूरी पर कंक्रीट बैचिंग प्लांट, धूल,दलदल और ख़ामोश अफ़सरशाही क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही खुलेगी हुकूमत की आँख

सारनी। विकास की दास्तानें सुनाने वालों के लिए शायद यह एक और परियोजना भर हो,लेकिन आम राहगीरों के लिए यह रोज़ का इम्तिहान बन चुकी है।660 मेगावाट सुपर क्रिटिकल इकाई के निर्माण के लिए मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के पूर्व चेक पोस्ट के समीप स्थापित एक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि से जुड़े बताए जा रहे कंक्रीट बैचिंग प्लांट ने बैतूल-कमानी गेट से परासिया तक के मिनी हाईवे को मानो दलदल एक्सप्रेस में तब्दील कर दिया है। विडंबना यह है कि सड़क पर उड़ती गर्द,गिरता मलबा और साँसों में घुलता धुआँ सबको दिखाई दे रहा है,लेकिन जिम्मेदार महकमों की बस़ारत जाने कहाँ गुम हो गई है।मुख्य मार्ग से महज़ पाँच मीटर की दूरी पर संचालित इस प्लांट से निकलने वाले भारी वाहन सड़क पर सीमेंट,गिट्टी और कंक्रीट का मलबा बिखेरते हुए निकलते हैं। नतीजा यह कि सड़क के दोनों किनारे दलदल में तब्दील हो चुके हैं। दोपहिया वाहन चालक हर पल फिसलने के ख़ौफ़ में सफ़र कर रहे हैं,जबकि चारपहिया वाहन भी धूल के घने गुबार में दिशा तक पहचानने को मजबूर हैं। शाम ढलते ही उड़ती धूल ऐसा मंज़र पेश करती है कि सामने से आने वाला वाहन दिखाई देना भी मुश्किल हो जाता है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस कंक्रीट बैचिंग प्लांट के संचालन के लिए मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सभी आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है यदि अनुमति है,तो प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन कहाँ हो रहा है और यदि अनुमति नहीं है,तो फिर यह बेख़ौफ़ संचालन किसकी सरपरस्ती में हो रहा है यह सवाल अब केवल जनता ही नहीं, बल्कि व्यवस्था की साख पर भी तमाचा बनकर खड़ा है।हैरानी की बात यह भी है कि प्लांट के बाहर या मुख्य मार्ग पर कहीं भी चेतावनी अथवा सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। रात के अंधेरे में तेज़ रफ़्तार से आने वाले वाहन चालकों के लिए यह स्थिति किसी जानलेवा जाल से कम नहीं। क्या सुरक्षा मानकों का पालन सिर्फ़ काग़ज़ों की ज़ीनत बनकर रह गया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्लांट हाल ही में शुरू हुआ है,लेकिन कुछ ही दिनों में सड़क की जो दुर्दशा हुई है,उसने भविष्य की तस्वीर साफ़ कर दी है। सबसे ज़्यादा हैरत इस बात पर है कि खनिज विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्थानीय प्रशासन और अन्य जिम्मेदार विभाग ऐसे ख़ामोश हैं,मानो उन्हें सब कुछ दिखाई देकर भी दिखाई नहीं दे रहा।आम नागरिक इसे प्रभाव और रसूख़ का असर मान रहे हैं।जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता को सुरक्षित रास्ता देना होता है,न कि ऐसा मंजर तैयार करना जहाँ हर सफ़र दुआ और दहशत के बीच गुज़रे। विकास यदि लोगों की जान जोखिम में डालकर आगे बढ़े,तो वह तरक़्क़ी नहीं,बल्कि अव्यवस्था की तामीर कहलाती है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है।क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने के बाद जागेगा, या फिर समय रहते सड़क की सफ़ाई,धूल नियंत्रण, सुरक्षा बोर्ड,जल छिड़काव और यातायात सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम कर इस ख़तरनाक स्थिति का समाधान करेगा क्योंकि हादसे कभी दस्तक देकर नहीं आते,लेकिन लापरवाही अक्सर उनके लिए रास्ता ज़रूर तैयार कर देती है। जो मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के पूर्व चेक पोस्ट से लेकर सीसी मार्ग के बीच बना हुआ है।

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