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हर दिल में अपनी छाप छोड़ गए सी.के.मेश्राम,42 वर्षों की सरकारी सेवा को भावुक विदाई

हर दिल में अपनी छाप छोड़ गए सी.के.मेश्राम,42 वर्षों की सरकारी सेवा को भावुक विदाई

शिक्षक से मुख्य नगर पालिका अधिकारी तक का प्रेरक सफर,सारनी की पहचान बन गए मेश्राम विदाई समारोह में उमड़ा जनसैलाब

सारनी। कुछ लोग सिर्फ नौकरी नहीं करते,बल्कि अपने व्यवहार,कार्यशैली और इंसानियत से लोगों के दिलों में ऐसी जगह बना लेते हैं कि उनकी विदाई एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए भावुक पल बन जाती है। नगर पालिका परिषद सारनी के मुख्य नगर पालिका अधिकारी चंद्र कुमार (सी.के.) मेश्राम की सेवानिवृत्ति भी कुछ ऐसी ही रही।मंगलवार 30 जून 2026 को 62 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने 42 वर्षों के शासकीय जीवन को विराम दिया।इनमें लगभग 12 वर्ष उन्होंने प्राथमिक शिक्षक के रूप में बच्चों का भविष्य संवारने में बिताए,जबकि करीब 30 वर्षों तक मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित मुख्य नगर पालिका अधिकारी के रूप में प्रदेश के अनेक नगरों में अपनी सेवाएं दीं।सारनी नगर पालिका से उनका जुड़ाव सबसे यादगार रहा। यहां उन्होंने कुल 8 वर्ष 6 माह तक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। 1 अक्टूबर 2018 से 22 सितंबर 2022 तक उन्होंने सफलतापूर्वक कार्य किया। इसके बाद कुछ समय के लिए उनका स्थानांतरण परासिया हुआ, लेकिन 5 दिसंबर 2022 को वे फिर सारनी लौटे और 30 जून 2026 तक नगर की सेवा करते रहे।अपने कार्यकाल में सी.के.मेश्राम ने विकास कार्यों के साथ-साथ लोगों के दिल भी जीते।उनकी सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने हर वर्ग के लोगों से संवाद बनाए रखा। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, जनप्रतिनिधि हों या अधिकारी-कर्मचारी,पत्रकार हों या आम नागरिक-हर किसी के साथ उन्होंने सम्मान और तालमेल का रिश्ता कायम रखा।यही वजह रही कि उनके कार्यकाल में राजनीतिक मतभेद कभी व्यक्तिगत टकराव में नहीं बदले।लोग अक्सर कहते थे कि मेश्राम साहब मुश्किल से मुश्किल हालात को भी अपनी समझदारी,शालीनता और बेहतर समन्वय से आसान बना देते थे।20 जून 1964 को बालाघाट जिले के बोरी (लालबर्रा) में जन्मे चंद्र कुमार मेश्राम ने उच्च शिक्षा के प्रति भी हमेशा गंभीरता दिखाई। उन्होंने डॉ.हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय,सागर से वर्ष 1990 में राजनीति शास्त्र में एम.ए.तथा वर्ष 1991 में इतिहास विषय से एम.ए.की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद 9 फरवरी 1984 से 15 फरवरी 1996 तक प्राथमिक शाला मोहनगांव में शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं। इसी दौरान उनका चयन 26 दिसंबर 1995 को मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से मुख्य नगर पालिका अधिकारी के पद पर हुआ।15 जनवरी 1996 को रामपुर बघेलान से शुरू हुआ उनका प्रशासनिक सफर सतना,बालाघाट, पांढुर्णा,नरसिंहपुर,सिवनी, छिंदवाड़ा,सीहोर,बैतूल सहित अनेक नगरों से होता हुआ अंतत सारनी में आकर पूरा हुआ। हर स्थान पर उन्होंने अपनी कार्यकुशलता और प्रशासनिक क्षमता की अलग पहचान बनाई।उनकी विदाई समारोह का दृश्य भी बेहद भावुक रहा। ऑफिसर्स क्लब में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस विभाग,मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी,नगर पालिका के अधिकारी- कर्मचारी,विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता,पत्रकार, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे। हर किसी की आंखों में सम्मान और दिल में अपनापन साफ दिखाई दे रहा था।लोगों ने उन्हें फूल-मालाओं से सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल,स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की कामना की, सी.के.मेश्राम की सबसे बड़ी पूंजी उनका व्यवहार,उनकी सादगी और लोगों को साथ लेकर चलने की कला रही। उन्होंने यह साबित किया कि प्रशासन केवल आदेशों से नहीं,बल्कि विश्वास,संवाद और इंसानियत से भी चलता है। यही वजह है कि उनकी विदाई के साथ सारनी के लोग एक ऐसे अधिकारी को अलविदा कह रहे हैं, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।आज जब वे सरकारी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर जीवन की नई पारी शुरू कर रहे हैं,तो पूरा सारनी नगर उनके स्वस्थ,सुखमय और दीर्घायु जीवन की कामना कर रहा है। बाबा मठारदेव से यही दुआ है कि सी.के.मेश्राम का आने वाला जीवन खुशियों,सम्मान और सुकून से भरपूर रहे।

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