सोशल मीडिया में शेर,धरातल पर ढेर कांग्रेस संगठन की असली परीक्षा अब मैदान में
ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं की कमी,शहरों में गुटबाजी की चर्चा; संगठन में नियुक्तियों को लेकर उठ रहे सवाल

सारनी। कभी बूथ स्तर तक मजबूत संगठन का दावा करने वाली कांग्रेस आज जिले से लेकर ब्लॉक स्तर तक एक अलग ही तस्वीर पेश करती नजर आ रही है। सोशल मीडिया पर रोज नए पदाधिकारियों की बधाइयों, बैठकों और सक्रियता की तस्वीरें दिखाई देती हैं, लेकिन धरातल पर संगठन की मौजूदगी तलाशने निकलें तो कई जगह सन्नाटा अधिक मिलता है। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस को लेकर तंज कसते हुए कहा जाने लगा है,”अखबार और सोशल मीडिया में शेर,धरातल पर ढेर।”कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिला एवं ब्लॉक स्तर पर संगठन विस्तार अपेक्षित गति से नहीं हो पाया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय कार्यकर्ताओं की कमी महसूस की जा रही है, जबकि शहरी क्षेत्रों में गुटबाजी की चर्चाएं लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि संगठन में जिम्मेदारियां योग्यता और सक्रियता से अधिक खेमों के संतुलन को ध्यान में रखकर दी गईं, जिससे वर्षों से पार्टी का झंडा उठाने वाले कई पुराने कार्यकर्ता स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे और जिला अध्यक्ष निलय डागा के समर्थकों को संगठन में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा और जिला प्रभारी सुनील उईके लगातार यह कहते रहे हैं कि सभी नियुक्तियां संगठनात्मक आवश्यकता और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप की गई हैं।फिलहाल सवाल यह है कि क्या कांग्रेस का संगठन मोबाइल स्क्रीन से निकलकर फिर गांव की चौपाल,वार्ड की गलियों और बूथ स्तर तक अपनी सक्रिय मौजूदगी दर्ज करा पाएगा क्योंकि चुनावी राजनीति में लाइक, कमेंट और पोस्ट से अधिक महत्व जनसंपर्क,कार्यकर्ता और जमीन पर दिखाई देने वाली सक्रियता का होता है। संगठन की असली ताकत पोस्टरों और पोस्टों से नहीं, बल्कि जनता के बीच खड़े कार्यकर्ताओं से मापी जाती है।











